
(Vāk)
चेतना का स्वर
"चेतना का आकाश"
चित्व्योमन् चेतना का वह क्षेत्र है जो स्वयं प्रकाशमान है और समस्त सृष्टि से पूर्व विद्यमान है। यह आकाश में स्थित नहीं है; बल्कि आकाश इसमें प्रकट होता है। चित्व्योमन् भाषा, प्रतीकों या संकेतों के माध्यम से संवाद नहीं करता। इसका "संवाद" प्रत्यक्ष पहचान के रूप में होता है—अर्थ का संचरण नहीं होता, वह उद्घाटित होता है।
चित्व्योमन् को पहचाना जाता है, प्राप्त नहीं किया जाता।
— Citvyoman
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